हिमाचल प्रदेश में मॉनसून एक बार फिर से अपने रौद्र रूप में सामने आया है। पहाड़ी राज्य में झमाझम बारिश ने जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट की स्थिति
- रेड अलर्ट: चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के लिए। यहां भारी से अति भारी बारिश की संभावना है।
- ऑरेंज अलर्ट: ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कुल्लू में। यहां मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।
- येलो अलर्ट: शिमला, सोलन और सिरमौर में। इन क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
तबाही का मंजर
पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में हालात बिगड़े हैं।
- बारिश का आँकड़ा: बिलासपुर में 190 मिमी और चंबा के जॉट में 160 मिमी बारिश दर्ज की गई।
- सड़कें बंद: 795 सड़कें, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं, यातायात के लिए पूरी तरह बाधित हैं।
- शिक्षण संस्थान बंद: चंबा, कांगड़ा, मंडी और ऊना में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र 26 अगस्त को बंद रहे।
- मकान क्षतिग्रस्त: कई घरों को नुकसान हुआ है और नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है।
अब तक का मॉनसून: बारिश का लेखा-जोखा
IMD के अनुसार, 1 जून से 25 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 22% अधिक बारिश हुई है।
- शिमला में सबसे अधिक 80% अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई।
- ऊना (62%), कुल्लू (60%) और मंडी (60%) भी सामान्य से काफी अधिक बारिश झेल चुके हैं।
- अगस्त माह में ही राज्य में 45% ज्यादा बारिश हुई, जबकि सोलन, कुल्लू और ऊना में सामान्य से दोगुनी बारिश हुई।
- केवल लाहौल-स्पीति जिला ऐसा रहा जहां सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई।
भूस्खलन और बाढ़ का खतरा
भारी बारिश के चलते भूस्खलन और फ्लैश फ्लड्स की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं।
- मिट्टी का कटाव और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बनी हुई है।
- खेतों और बागवानी को भारी नुकसान हुआ है।
- कमजोर घरों और संरचनाओं के ढहने का खतरा है।
- वाहन चालकों को खासतौर पर शिमला, सोलन, सिरमौर और कांगड़ा में सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है।
सरकार और प्रशासन की तैयारी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकार किसी भी आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- NDRF और SDRF की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं।
- मंडी जिले में फंसे 63 पर्यटकों और कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया।
- प्रभावित परिवारों को किराए के लिए ₹5,000 प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है।
भाखड़ा बांध का संकट
बारिश का असर भाखड़ा बांध पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
- बांध का जलस्तर 1668.57 फुट दर्ज किया गया है, जो अधिकतम सीमा (1680 फुट) से मात्र 11 फुट कम है।
- फ्लड गेट खोल दिए गए हैं ताकि पानी का स्तर नियंत्रित किया जा सके।
- सतलुज नदी और उससे जुड़ी नहरों में भी लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
दर्दनाक हादसे और जनहानि
भारी बारिश ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है।
- सुजानपुर हादसा: 84 वर्षीय बुजुर्ग रवि कुमार का मकान बारिश के चलते ढह गया। गनीमत रही कि वे सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए।
- मनाली तबाही: ब्यास नदी के तेज बहाव में मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा बह गया। बाहंग में एक रेस्टोरेंट और चार दुकानें नदी में समा गईं।
- धर्मशाला हादसा: एचआरटीसी वर्कशॉप के पास एक बहुमंजिला मकान ढह गया। सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ।
- शाहपुर क्षेत्र में भूस्खलन से एक परिवार की गोशाला ढह गई और 15 भेड़-बकरियों की मौत हो गई।
मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग का अनुमान है कि:
- 27 अगस्त से बारिश की तीव्रता में कमी आएगी।
- हालांकि 31 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
- शिमला, सिरमौर और किन्नौर में फिलहाल कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन अन्य जिलों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में इस बार का मॉनसून सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि तबाही का पर्याय बन गया है। नदियों का उफान, भूस्खलन, मकानों का ढहना और सड़कों का टूटना—यह सब प्रकृति की ताकत और असहाय मानव जीवन को सामने लाता है। सरकार और प्रशासन राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा हथियार जनता की सतर्कता और सजगता ही है।







